अब क्‍या होगा

जयललिता के खिलाफ क्या है मामला
एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता पर आरोप था कि 1991 से 1996 के दौरान बतौर मुख्‍यमंत्री उन्‍होंने आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति जमा की। इस दौरान बतौर मुख्‍यमंत्री उन्‍होंने एक रुपया महीना वेतन लिया। इसके बावजूद पांच साल में उनकी संपत्ति तीन करोड़ रुपए से बढ़ कर 66.65 करोड़ रुपए हो गई। मामले में उनकी सहयोगी शशिकला नटराजन, उनकी रिश्तेदार इलावरासी और उनके गोद लिए लेकिन बाद में बेदखल किए गए सुधाकरन को भी आरोपी बनाया गया था। जया के खिलाफ भ्रष्‍टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया गया था।
 
छापे के दौरान मिला था 28 किलो सोना
1996 में जब जयललिता के घर पर छापा मारा गया था तब 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 10 हजार साडि़यां, 750 जूते और 51 घडि़यां बरामद हुई थीं।
 
अब क्‍या होगा
सजा का एलान हाते ही जयललिता की विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाएगी
उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी
वह चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगी
वह हाईकोर्ट में अपील कर सकती हैं। अगर वहां वह बरी हो गईं तब वह चुनाव लड़ सकेंगी। 
 
राजनीतिक असर 
पार्टी पर जयललिता की पकड़ घटेगी, पार्टी के सामने नेतृत्‍व का संकट खड़ा हो सकता है।
नया मुख्‍यमंत्री चुना जाएगा, जिसके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी पर पकड़ बनाने की होगी।
केंद्र में राज्‍यसभा में एआईएडीएमके सांसदों का रुझान एनडीए की ओर बढ़ सकता है।
तमिलनाडु में भाजपा को राज्‍य में जमीन बनाने में मिलने वाली चुनौती थोड़ी कम हो सकती है।

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जयललिता के खिलाफ क्या है मामला

बेंगलुरु. एआईएडीएमके (ऑल इंडिया अन्‍ना द्रविड़ मुनेत्र कडगम) की प्रमुख और तमिलनाडु की सीएम जयललिता को बेंगलुरु की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के 18 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया है। यहां विशेष अदालत के जज जॉन माइकल डी कुन्हा ने फैसला सुनाया। उन्हें अधिकतम सात साल कैद की सजा सुनाई जा सकती है। फैसला आते ही जयललिता के समर्थक उग्र हो गए और उन्‍होंने चेन्‍नई में डीएमके प्रमुख करुणानिधि के घर के बाहर पथराव किया। पुलिस ने एआईएडीएमके और डीएमके के बड़े नेताओं के घर-दफ्तर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी है। पार्टी मुख्यालयों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
 
जयललिता के खिलाफ क्या है मामला
एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता पर आरोप था कि 1991 से 1996 के दौरान बतौर मुख्‍यमंत्री उन्‍होंने आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति जमा की। इस दौरान बतौर मुख्‍यमंत्री उन्‍होंने एक रुपया महीना वेतन लिया। इसके बावजूद पांच साल में उनकी संपत्ति तीन करोड़ रुपए से बढ़ कर 66.65 करोड़ रुपए हो गई। मामले में उनकी सहयोगी शशिकला नटराजन, उनकी रिश्तेदार इलावरासी और उनके गोद लिए लेकिन बाद में बेदखल किए गए सुधाकरन को भी आरोपी बनाया गया था। जया के खिलाफ भ्रष्‍टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया गया था।
 
छापे के दौरान मिला था 28 किलो सोना
1996 में जब जयललिता के घर पर छापा मारा गया था तब 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 10 हजार साडि़यां, 750 जूते और 51 घडि़यां बरामद हुई थीं।
 
अब क्‍या होगा
सजा का एलान हाते ही जयललिता की विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाएगी
उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी
वह चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगी
वह हाईकोर्ट में अपील कर सकती हैं। अगर वहां वह बरी हो गईं तब वह चुनाव लड़ सकेंगी। 
 
राजनीतिक असर 
पार्टी पर जयललिता की पकड़ घटेगी, पार्टी के सामने नेतृत्‍व का संकट खड़ा हो सकता है।
नया मुख्‍यमंत्री चुना जाएगा, जिसके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी पर पकड़ बनाने की होगी।
केंद्र में राज्‍यसभा में एआईएडीएमके सांसदों का रुझान एनडीए की ओर बढ़ सकता है।
तमिलनाडु में भाजपा को राज्‍य में जमीन बनाने में मिलने वाली चुनौती थोड़ी कम हो सकती है।

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भारतीय मीडिया में शोर

न्यूयॉर्क. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार रात (भारतीय समयानुसार) न्‍यूयॉर्क पहुंचे। वह नारे लगाते समर्थकों से मिलने सड़क पर निकल आए और उनसे हाथ मिलाया। मोदी शनिवार को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के सम्‍मेलन में भाषण देंगे। इससे पहले वह श्रीलंका, नेपाल औऱ बांग्लादेश के नेताओं से मुलाकात करेंगे। 27 सितंबर की शुरुआत मोदी 9/11 आतंकी हमले में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देकर करेंगे। उनके पांच दिनी अमेरिका दौरे  के पल-पल की खबर भारतीय मीडिया दे रहा है। लेकिन अमेरिकी मीडिया से मोदी  लगभग गायब हैं। अमेरिका पहुंचने से पहले मोदी ने 'वॉल स्‍ट्रीट जर्नल' में लेख लिख कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। लेकिन अमेरिका के ज्यादातर बड़े अखबार मोदी के दौरे को खास तवज्जो देते नहीं दिख रहे। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पेज पर मोदी के दौरे को लेकर एक छोटी सी रिपोर्ट तो प्रकाशित की गई, लेकिन शनिवार सुबह 11:50 बजे तक अखबार की वेबसाइट के होम पेज पर मोदी के बारे में केवल एक खबर थी। यह खबर उनकी अमेरिका यात्रा से जुड़ी नहीं, बल्कि उन्‍हें गुजरात दंगों को लेकर अमेरिकी कोर्ट से समन भेजे जाने के संबंध में थी। एक अन्य प्रमुख समाचार-पत्र  वाशिंगटन पोस्ट में पहले पेज पर मोदी के दौरे की खबर को स्थान नहीं मिल पाया। वहीं, अखबार की वेबसाइट के होम पेज पर भी मोदी के दौरे की रिपोर्ट नहीं दिखती। इसके अलावा वॉल स्ट्रीट जर्नल और यूएसए टुडे की वेबसाइट पर भारतीय पीएम के दौरे को प्रमुखता नहीं दी गई है।शिकागो ट्रिब्यून की न्यूज वेबसाइट के होम पेज पर भी मोदी के अमेरिकी दौरे की कोई खबर नहीं है। 
 
न्यूयॉर्क में लोगों को नहीं पता कौन हैं मोदी ?
एक भारतीय न्यूज चैनल के रिपोर्टर ने जब अमेरिकी नागरिकों को नरेंद्र मोदी का फोटो दिखाकर उनके बारे में पूछा तो ज्यादातर लोग उन्हें नहीं पहचान पाए। जिन लोगों से मोदी के बारे में पूछा गया, उनमें से ज्यादातर को इस बात की भी जानकारी नहीं थी कि वह भारत के पीएम हैं और न्यूयॉर्क आ रहे हैं।  
 
भारतीय मीडिया में शोर
मोदी के अमेरिकी दौरे की भारतीय मीडिया व्यापक कवरेज कर रहा है। देश के प्रमुख समाचार पत्र मोदी के दौरे को पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित कर रहे हैं। देश के करीब 85 पत्रकार मोदी की यात्रा को कवर करने अमेरिका गए हैं। इनमें से करीब आधा दर्जन ही हैं जिन्‍हें मोदी अपने साथ ले गए हैं। भारत में सोशल मीडिया पर भी मोदी के दौरे से संबंधित टॉपिक टॉप ट्रेंड में हैं।

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मोदी को समन सौंपने पर इनाम

न्यूयॉर्क। 2002 के गुजरात दंगा मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ याचिका दाखिल कर कोर्ट द्वारा समन जारी करवाने वाले मानवाधिकार संगठन अमेरिकन जस्टिस सेंटर (एजेसी) ने कहा है कि जो भी शख्‍स मोदी को यह समन सौंपेगा, उसे 10 हजार डॉलर (करीब 6 लाख रुपए) का इनाम दिया जाएगा। हालांकि, संगठन ने शर्त रखी है कि बतौर सबूत उस शख्‍स को समन सौंपने के दौरान का वीडियो भी पेश करना होगा। उधर, अमेरिका मोदी के बचाव में उतर आया है और उसने कहा है कि राजनयिक छूट हासिल होने की वजह से मोदी के खिलाफ किसी भी अमेरिकी कोर्ट में मामला नहीं चलाया जा सकता है। 
 
मोदी को समन सौंपने पर इनाम
गुजरात दंगा मामले में बतौर मुख्‍यमंत्री मोदी की भूमिका पर एजेसी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद न्‍यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत ने समन जारी किया था। इसमें 21 दिनों के भीतर जवाब देने की बात कही गई थी। कोर्ट का यह फैसला मोदी के अमेरिका पहुंचने से ठीक पहले आया था। एजेसी ने अब एक बयान जारी कर समन सौंपने वाले शख्‍स को इनाम देने की बात कही है। एजेसी के कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्‍नून ने कहा, 'संगठन अगले दो दिनों में शहर में मोदी के विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान उन तक अदालत का समन पहुंचाने वाले शख्‍स को 10 हजार डॉलर का इनाम देने की पेशकश करता है। इनाम उसी को दिया जाएगा जो बतौर सबूत समन सौंपने की तस्वीर और वीडियो ला कर देगा।'
 
बताया जा रहा है कि एजेसी ने इस काम के लिए कुछ लोगों को भाड़े पर भी नियुक्त किया है। संगठन का कहना है कि जो कुछ भी किया जा रहा है वह न्‍यूयॉर्क के कानून के अनुसार किया जा रहा है और इसके मुताबिक, समन सौंपने का काम कम से कम 10 फुट की दूरी से भी किया जा सकता है और संबद्ध व्यक्ति पर दस्तावेज फेंके भी जा सकते हैं।
 
अमेरिका ने किया बचाव
ओबामा प्रशासन ने मोदी के खिलाफ समन जारी किए जाने पर ऐतराज जताया है। अमेरिकी सरकार की तरफ से कहा गया कि बतौर एक राष्ट्राध्यक्ष, अमेरिकी यात्रा के दौरान मोदी को कानूनी कार्यवाहियों से छूट हासिल है और न तो उन्‍हें कोई समन सौंपा जा सकता है और न ही किसी अदालत में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'मैं विशेष तौर पर इस समन के खिलाफ कुछ नहीं कह सकता, लेकिन सामान्‍य कानूनी सिद्धांतों के मुताबिक, अमेरिकी अदालतों में मुकदमों से राष्‍ट्राध्‍यक्षों को पूरी छूट प्राप्‍त है।'

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