बेंगलुरु. एआईएडीएमके (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडगम) की प्रमुख और तमिलनाडु की सीएम जयललिता को बेंगलुरु की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के 18 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया है। यहां विशेष अदालत के जज जॉन माइकल डी कुन्हा ने फैसला सुनाया। उन्हें अधिकतम सात साल कैद की सजा सुनाई जा सकती है। फैसला आते ही जयललिता के समर्थक उग्र हो गए और उन्होंने चेन्नई में डीएमके प्रमुख करुणानिधि के घर के बाहर पथराव किया। पुलिस ने एआईएडीएमके और डीएमके के बड़े नेताओं के घर-दफ्तर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी है। पार्टी मुख्यालयों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
जयललिता के खिलाफ क्या है मामला
एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता पर आरोप था कि 1991 से 1996 के दौरान बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति जमा की। इस दौरान बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने एक रुपया महीना वेतन लिया। इसके बावजूद पांच साल में उनकी संपत्ति तीन करोड़ रुपए से बढ़ कर 66.65 करोड़ रुपए हो गई। मामले में उनकी सहयोगी शशिकला नटराजन, उनकी रिश्तेदार इलावरासी और उनके गोद लिए लेकिन बाद में बेदखल किए गए सुधाकरन को भी आरोपी बनाया गया था। जया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया गया था।
एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता पर आरोप था कि 1991 से 1996 के दौरान बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति जमा की। इस दौरान बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने एक रुपया महीना वेतन लिया। इसके बावजूद पांच साल में उनकी संपत्ति तीन करोड़ रुपए से बढ़ कर 66.65 करोड़ रुपए हो गई। मामले में उनकी सहयोगी शशिकला नटराजन, उनकी रिश्तेदार इलावरासी और उनके गोद लिए लेकिन बाद में बेदखल किए गए सुधाकरन को भी आरोपी बनाया गया था। जया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया गया था।
छापे के दौरान मिला था 28 किलो सोना
1996 में जब जयललिता के घर पर छापा मारा गया था तब 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 10 हजार साडि़यां, 750 जूते और 51 घडि़यां बरामद हुई थीं।
अब क्या होगा
सजा का एलान हाते ही जयललिता की विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाएगी
उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी
वह चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगी
वह हाईकोर्ट में अपील कर सकती हैं। अगर वहां वह बरी हो गईं तब वह चुनाव लड़ सकेंगी।
राजनीतिक असर
पार्टी पर जयललिता की पकड़ घटेगी, पार्टी के सामने नेतृत्व का संकट खड़ा हो सकता है।
नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा, जिसके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी पर पकड़ बनाने की होगी।
केंद्र में राज्यसभा में एआईएडीएमके सांसदों का रुझान एनडीए की ओर बढ़ सकता है।
तमिलनाडु में भाजपा को राज्य में जमीन बनाने में मिलने वाली चुनौती थोड़ी कम हो सकती है।

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